क्या आप भी Mobile या Computer पर घंटों बिता रहे, यह जानना आपके लिए बेहद जरुरी.

नौकरीपेशा हो या कारोबारी या फिर खुद का बिजनेस करने वाले लोग मोबाइल और लैपटॉप या कंप्यूटर के बिना कामकाज करना मुमकिन नहीं है। खासकर कोरोना काल के बाद वर्क फ्रॉम होम के बढ़ते चलन में तो इन डिवाइसेस का इस्तेमाल अनिवार्य बना ही दिया है। साथ ही इनका औसत यूज भी अब पहले से ज्यादा हो गया है।

ऐसे में इनका बढ़ते इस्तेमाल किस तरह से सेहत का सत्यानाश कर रहा है, इसका खुलासा एक रिसर्च में हुआ है। रिसर्च के मुताबिक मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोग न्यूरेल्जिया बीमारी के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोगों के कंधों और कान में दर्द की शिकायत बढ़ रही है। दरअसल, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने से ये शिकायतें सामने आ रही हैं।

वैज्ञानिकों ने नयी रिसर्च में किया खुलासा

रिसर्च में दावा किया गया है कि सीधे बैठकर लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करने से गर्दन पर पाँच किलो अतिरिक्त वज़न बढ़ता है। गर्दन को आगे की तरफ झुकाने पर ये वज़न भी बढ़ता चला जाता है। हड्डियों पर और प्राकर्तिक दबाव होने की वजह से आसपास की मांसपेशियां थकान महसूस करती हैं और गर्दन के पीछे की तरफ दर्द होने लगता है। इसके चलते लोग सिर दर्द, कंधे के दर्द या सर्वाइकल जैसी बीमारी का सामना करने को मजबूर हो जाते हैं। रिसर्च के मुताबिक न्यूरोलॉजी के मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है। पेन क्लीनिक में ऐसे मरीजों का काफी आना जाना हो रहा है, जिनमें से ज्यादातर गर्दन की समस्या से परेशान हैं।

कोरोना के बाद बढ़ा वर्क फ्रॉम होम

ये परेशानियां बीते दो साल में ज्यादा बढ़ी हैं क्योंकि कोरोना काल के दौरान मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने का समय करीब 10 गुना बढ़ गया है। वर्क फ्रॉम होम का कल्चर बढ़ने की वजह से मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। इसके चलते ज्यादा लोग न्यूरोलॉजी के शिकार हो रहे हैं। साफ है कि अभी स्मार्ट फोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करने और ब्रेक लेकर इससे बचने के तरीके खोजने होंगे।

क्या आप भी Mobile या Computer पर घंटों बिता रहे, यह जानना आपके लिए बेहद जरुरी.

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